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भागलपुर में शराबबंदी पर बड़ा सवाल: उत्पाद विभाग की गाड़ी से शराब बरामद, चालक नशे में हंगामा करता रहा

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भागलपुर में उत्पाद विभाग की सरकारी गाड़ी से शराब मिलने और चालक के नशे में हंगामा करने का मामला सामने आया है। पुलिस की निष्क्रियता पर भी उठे सवाल।

भागलपुर/आलम की खबर:बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के बीच भागलपुर से सामने आई एक घटना ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाथनगर थाना क्षेत्र के मदनीनगर चौक के पास शुक्रवार देर रात जो कुछ हुआ, उसने न सिर्फ प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी, बल्कि कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी लोगों के मन में गहरी चिंता पैदा कर दी है।

जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब मद्य निषेध विभाग से जुड़ी एक सरकारी गाड़ी—जिस पर रेड और ब्लू लाइट लगी थी—सड़क पर खड़ी दिखी। गाड़ी पर स्पष्ट रूप से “अधीक्षक मद्य निषेध, ग्रुप सेंटर-3, भागलपुर” लिखा हुआ था। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इस गाड़ी का चालक खुद नशे में धुत बताया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चालक ने गाड़ी को ट्रैफिक सिग्नल के पास रोका और नशे की हालत में सड़क पर हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान वहां से गुजर रही कुछ महिलाओं के साथ उसने अभद्र व्यवहार किया और फब्तियां कसने लगा। जब आसपास मौजूद लोगों ने इसका विरोध किया, तो चालक ने अपनी गलती मानने के बजाय सरकारी रौब दिखाते हुए खुद को अधिकारी बताना शुरू कर दिया।

बताया जाता है कि स्थानीय युवाओं ने स्थिति को बिगड़ता देख चालक को मदनीनगर गोलंबर के पास घेर लिया। वहां भी उसने लोगों को डराने-धमकाने की कोशिश की और कहा कि वह एक्साइज विभाग से जुड़ा है और किसी को भी कानूनी पचड़े में फंसा सकता है। इस दौरान मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब स्थानीय लोगों ने गाड़ी की तलाशी ली। तलाशी के दौरान गाड़ी के अंदर, खासकर गियर के पास, अंग्रेजी शराब की बोतल बरामद होने की बात सामने आई। यह खुलासा होते ही लोगों का गुस्सा और बढ़ गया, क्योंकि जिस विभाग की जिम्मेदारी शराबबंदी लागू कराने की है, उसी की गाड़ी से शराब मिलना एक बड़ी विडंबना के रूप में देखा गया।

घटना की सूचना तुरंत डायल 112 पर पुलिस को दी गई। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंची। हैरानी की बात यह है कि घटनास्थल से नाथनगर थाना महज करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, फिर भी पुलिस की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए।

लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर पहुंचती, तो आरोपी चालक को मौके पर ही गिरफ्तार किया जा सकता था और स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लिया जा सकता था। लेकिन पुलिस की देरी ने लोगों में नाराजगी और अविश्वास दोनों को बढ़ा दिया।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित रूप से देखा जा सकता है कि चालक किस तरह नशे की हालत में लोगों से उलझ रहा है और खुद को सरकारी अधिकारी बताकर धमकी दे रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर और भी सवाल उठने लगे हैं।

इस घटना ने बिहार में शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सरकार जहां एक ओर इस कानून को सख्ती से लागू करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं जमीनी हकीकत को उजागर करती नजर आती हैं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की गलती नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। यदि जिम्मेदार विभागों के लोग ही नियमों का उल्लंघन करेंगे, तो आम जनता से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

वहीं प्रशासनिक स्तर पर अब तक इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित विभाग इस मामले में जांच के आदेश दे सकता है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

कुल मिलाकर, भागलपुर की यह घटना बिहार में लागू शराबबंदी कानून की जमीनी सच्चाई को सामने लाती है। यह मामला न सिर्फ कानून के पालन को लेकर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि व्यवस्था में सुधार की अभी भी कितनी जरूरत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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